लॉकडाउन में लॉक हो गया करोड़ों का 'हरा सोना'

लॉकडाउन के चलते यूपी समेत देश के 6 राज्यों एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र में हरा सोना यानि तेंदू पत्ता जंगलों में लॉक हो गया है। एमपी देश में सवार्धिक तेंदू पत्ते का उत्पादक राज्य है। यूपी में सर्वाधिक तेंदू पत्ता बुन्देलखण्ड से निकलता है। इन्हीं पत्तों से बीड़ी बनती है। पत्तों की तुड़ाई और संग्रहण के ठेकों से राज्यों को भारी राजस्व मिलता है, जो ग्राणीण अर्थव्यवस्था की तकदीर तय करता है। अप्रैल से शुरू होने वाली पत्तों की तुड़ान ठप पड़ी है। इससे देश के लाखों श्रमिक परेशान हैं। क्योंकि अप्रैल-मई की कमाई उनके सालभर काम आती है। सभी राज्य लॉकडाउन-3 की नई गाइड लाइन पर मंथन कर इसे शुरू कराने का रास्ता खोज रहे हैं।


यूपी के बुन्देलखण्ड के करीब 25 हजार श्रमिकों के लिए हरा सोना पीले सोने से कम हैसियत नहीं रखता है। जंगलों में अप्रैल-मई में तपती धूप और जंगली जानवरों से बैखौफ बुन्देली श्रमिक जान हथेली पर रखकर इस हरे सोने को निकालकर लाते हैं। इसके बदले उन्हें दिहाड़ी मिलती है। अप्रैल-मई की दिहाड़ी से ही बुन्देली सालभर के राशन-पानी और बेटियों के ब्याह के सपने बुनते हैं। काम अभी शुरू न होने से श्रमिकों के अरमान टूट रहे हैं तो रोजी-रोटी की चिंता जान हलक में डाले है। लॉकडाउन की वजह से मजदूरों के सामने परिवार के साथ गांव-देहात से 30 से 40 किमी. दूर जंगल तक जाना बड़ी चुनौती है। वहीं, वन निगम ने भी अभी तक कोई तैयारी तक नहीं शुरू की है। फड़ों और फड़ मुंशियों का चयन अभी नहीं हो सका है। इकाई अधिकारियों की तैनाती भी नहीं हो पाई है।


बुन्देलखण्ड कमाकर देता है 55 करोड़
शासन ने वन निगम को इस बार 27450 मानक बोरा तेंदू पत्ते का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष करीब 28 हजार मानक बोरा तेंदू का पत्ता तोड़ा गया था। अलग-अलग जंगलों में पांच हजार परिवारों के 25 हजार श्रमिक पत्ता तोड़ते हैं। वन निगम तेंदू पत्ता तुड़ान से करीब 55 करोड़ का व्यापार करता है। पत्ता तोड़कर फडों में पहुंचाने वाले मजदूरों को करीब पांच करोड़ की मजदूरी हर साल वन निगम बांटता है।


मध्यप्रदेश सर्वाधिक उत्पादक राज्य है
मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक तेंदूपत्ते का उत्पादक राज्य है। प्रदेश का औसत वार्षिक तेंदूपत्ता उत्पादन लगभग 25 लाख मानक बोरा है जो देश के कुल तेंदूपत्ता वार्षिक उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। मप्र. में तेंदूपत्ता के एक मानक बोरे में 50-50 पत्ते की 1000 गड्डियां होती हैं।


चित्रकूट में होता है सबसे अधिक तेंदू पत्ता
चित्रकूट में सबसे अधिक तेंदू पत्ता होता है। इसके लिए वन निगम कई जनपदों से इकाई अधिकारियों को बुलाकर उनकी नियुक्ति करता है। इनकी तैनाती अप्रैल माह में ही कर दी जाती है। इस बार लॉकडाउन की वजह से इकाई अधिकारी नहीं आ पाए हैं।


इस बार डकैतों का नहीं कोरोना का खौफ
एमपी और यूपी की सीमा से लगे पाठा के जंगलों में तेंदू सर्वाधिक है। यहां पिछले चार दशक से डकैतों का बोलबाला रहा है। दस्यु गिरोह तेंदू पत्ते के तुड़ान में दखलंदाजी कर चौथ वसूली करते थे, पर अब इनका खौफ तो नहीं है पर श्रमिक कोरोना से खौफजदा हैं।


कागजों पर सात सेक्शन व 45 यूनिट बनी
बुन्देलखण्ड तीन जिलों बांदा, चित्रकूट और महोबा में तेंदू पत्ता तुड़ान के लिए वन निगम ने फौरी तैयारियां कागजों पर कर ली है। सात सेक्शन व 45 यूनिट बन गई हैं, लेकिन अभी जिम्मेदारों की तैनाती नहीं हो सकी है। जंगलों से पत्तों के संग्रहण के बाद इन्हें सुखाया जाता है फिर वन निगम इन्हें मानिकपुर, कर्वी व अतर्रा के गोदामों में पहुंचाता है। जहां टेंडर खुलने पर बीड़ी कारोबारी इसे खरीदते हैं।


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