विलुप्त हो चुका देशी टाइगर 81 साल बाद यहाँ दिखा, विलुप्त होने के पीछे थी खास बजह
जंगल की दुनिया को प्रकृति ने बड़ा ही खूबसूरत बनाया है, लेकिन इंसानों की जब से यहां नजर पड़ी है सब बर्बाद हो चुका है. पेड़-पौधे जानवर सब विलुप्त हो चुके हैं. कहने का मतलब इंसान ने अपने स्वार्थ के चलते सारे जंगल को खत्म कर दिया है.
अक्सर हमारा दिल इस बात को सुनकर बड़ा दुखता है, जब कोई देसी जानवर किसी कारणवश जंगल से गायब हो जाए! ऐसा ही कुछ हुआ गुआटाला औत्रमघाट अभयारण्य में जहां 81 साल बाद टाइगर के दर्शन हुए है.
1940 के बाद से पहली बार गुआटाला औत्रमघाट वन्यजीव अभयारण्य में एक बाघ देखा गया है, अधिकारियों ने कहा कि बाघ शिकार की तलाश में महाराष्ट्र के औरंगाबाद से 330 किमी दूर यवतमाल में टीपेश्वर अभयारण्य में भटक गया है.
यह बाघ, जो पूरी तरह से विकसित नर है, 11-12 मार्च के आसपास अभयारण्य में आया था और 15 मार्च को एक जंगल के कैमरे में देखा गया था. सतपुते ने कहा ने बताया कि यह टीपेश्वर क्षेत्र के अंतर्गत आता है और हमने इसकी धारियों के माध्यम से पुष्टि की है. यहां पहुंचने के लिए बाघ की पुष्टि नहीं की गई है क्योंकि इसे कॉलर नहीं पहनाया गया है.
इस बाघ पर नजर रखने के लिए सात टीमों का गठन किया है. बताया जा रहा है कि यह बाघ लगभग 2,000 किलोमीटर की यात्रा पूरी करके आया है. अधिकारियों का कहना ऐसे गलियारों को महत्वपूर्ण बाघ निवास के रूप में घोषित किया जाना चाहिए और ऐसे मार्गों की सुरक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ वन्यजीव प्रबंधन प्रथाओं को लागू किया जाना चाहिए.

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