देखें तस्वीर वनमानुष बाबा के दीदार की, लगते है 8 घंटे श्रृंगार में


महाकुंभ में आए कल्पवासी संतों के रंग निराले हैं। कोई हठयोग की साधना से तो कोई कद-काठी से श्रद्धालुओं को अचरज में डाल रहा है। इसी तरह वनमानुष बाबा (रक्तचंदन महाराज) भी आकर्षण का केंद्र हैं। वह रक्तचंदन से हर रोज आठ घंटे श्रृंगार करते हैं। माथे से लेकर पूरे शरीर में रक्तचंदन के श्रृंगार के बाद ही श्रद्धालुओं को उनके दीदार होते हैं। मायादेवी मंदिर परिसर में रथनुमा सजी जीप ही बाबा की चलती-फिरती छावनी है। बाबा के आशीर्वाद के लिए भीड़ उमड़ रही है। 

जूना अखाड़े से जुड़े वनमानुष बाबा का असली नाम सालिक राम नंद है। वह मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के रहने वाले हैं। नरसिंहपुर स्थित बरमान घाट पर ही साधना करते हैं।


अपने अनूठे श्रृंगार के चलते वह वनमानुष बाबा (रक्तचंदन महाराज) के नाम से चर्चित हैं। रक्तचंदन बाबा बताते हैं कि वह मां काली के उपासक हैं। वर्ष 1996 से ही शरीर पर रक्तचंदन से श्रृंगार करते आ रहे हैं। श्रृंगार करने में उन्हें आठ घंटे लगते हैं। रोजाना तीन बजे उठ जाते हैं। नित्यकर्म के बाद रक्तचंदन की घिसाई करते हैं और सुई की मदद से पूरे शरीर पर श्रृंगार करते हैं। माथे से लेकर छाती, पेट, हाथों से लेकर आंखों की भौंहों तक को संवारते हैं। बाबा अपने रथनुमा जीप पर ही रहते और सोते हैं। सिर्फ स्नान और शौच के लिए नीचे पैर रखते हैं। श्रृंगार पूरा करने के बाद जीप में बैठकर ही श्रद्धालुओं को दर्शन देकर आशीर्वाद देते हैं। 

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