आशंका है कि हो सकती है स्पेनिश फ्लू की वापसी, खतरनाक हो सकता है कोरोना
साल 2020 जिस कोरोना वायरस महामारी की भेंट चढ़ गया और अभी भी कई देशों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वहीं, वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि आने वाले नजदीकी भविष्य में भी हो सकता है कि इस महामारी से छुटकारा न मिले। वैज्ञानिकों को यह चिंता दुनियाभर के देशों में कोरोना वायरस के नए-नए स्ट्रेन सामने आने और कई म्यूटेशन होने के बाद वैक्सीन के अप्रभावी होने की आशंका की वजह से हो रही है।
दरअसल, कुछ शोध में इस तरह के संकेत मिले हैं कि कोरोना वायरस म्यूटेशन के जरिए खुद को मौसम के अनुसार ढाल सकता है। ऐसे में यह हो सकता है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में साल में कम से कम एक बार इस महामारी का सामना करना पड़े।
वायरस के ऐसे स्वभाव के कारण वैज्ञानिक इनकी क्षमताओं को लेकर चिंतित हैं और मान रहे हैं कि भविष्य में ये स्पैनिश फ्लू जैसी महामारी का कारण बन सकते हैं।
साल 1918 में आई स्पैनिश फ्लू या इंफ्लुएंजा के चलते करीब पांच करोड़ लोगों की जान गई थी। वर्ल्ड वाइड इंफ्लुएंजा सेंटर के निदेशक डॉ. मैक्कॉले कहते हैं कि सबसे बड़ी चिंता मौसमी फ्लू है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में महामारी फ्लू स्ट्रेन के रूप में आ सकती है। जो कोरोना और फ्लू दोनों से संक्रमित होंगे, उनकी मौत की संख्या केवल कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों की तुलना में दोगुनी हो सकती है।
डॉ. मैक्कॉले ने कहा, हो सकता है कि हमें फिर से स्पैनिश फ्लू जैसी स्थिति देखनी पड़े। हमें ऐसी घटनाओं के लिए तैयार रहना चाहिए। बता दें कि पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने स्पैनिश फ्लू के फैलने का अध्ययन किया ताकि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक आपात योजना तैयार की जा सके। इसका सबसे अहम सबक यह था कि 1918 के पतझड़ के वक्त पर इस बीमारी की दूसरी लहर पहली के मुकाबले ज्यादा घातक साबित हुई थी।
साल 1918 में आई स्पैनिश फ्लू या इंफ्लुएंजा के चलते करीब पांच करोड़ लोगों की जान गई थी। वर्ल्ड वाइड इंफ्लुएंजा सेंटर के निदेशक डॉ. मैक्कॉले कहते हैं कि सबसे बड़ी चिंता मौसमी फ्लू है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में महामारी फ्लू स्ट्रेन के रूप में आ सकती है। जो कोरोना और फ्लू दोनों से संक्रमित होंगे, उनकी मौत की संख्या केवल कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों की तुलना में दोगुनी हो सकती है।
डॉ. मैक्कॉले ने कहा, हो सकता है कि हमें फिर से स्पैनिश फ्लू जैसी स्थिति देखनी पड़े। हमें ऐसी घटनाओं के लिए तैयार रहना चाहिए। बता दें कि पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने स्पैनिश फ्लू के फैलने का अध्ययन किया ताकि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक आपात योजना तैयार की जा सके। इसका सबसे अहम सबक यह था कि 1918 के पतझड़ के वक्त पर इस बीमारी की दूसरी लहर पहली के मुकाबले ज्यादा घातक साबित हुई थी।

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