सौ से ज्यादा बच्चो के बाप है रूपचन्द्र गन्धर्व बसा दिया पूरा गांव
आपको थोड़ा अटपटा लगेगा। जब यह पता चलेगा कि सैकड़ों बच्चों का पिता एक है। जी, हां बजाप्ता एक गांव बसा है। जहां सभी बच्चों की मां तो अलग है लेकिन पिता एक ही है। कोई भी सुनता है तो एक बार चौक जाता है। ऐसा भी है। बिल्कुल सच है। आइए, हम ले चलते हैं उस गांव में जहां आप किसी बच्चे से उसके पिता का नाम पूछेंगे तो वह बताएगा कि उसके पिता नाम रूपचंद गंर्धव है।
आइए चलते हैं रूपचंद के गांव
झारखंड सीमा से लगा बिहार के बांका जिले के बौंसी का चिकनमाटी बस्ती।
विद्यालय पंजी से हटा काला नाम, मतदाता सूची दे रहा टीस
चिकनमाटी और शोभापाथर गंधर्व बस्ती के बच्चे उच्च विद्यालय सिकंदरपुर में पढ़ते हैं। विद्यालय के शिक्षक कैलाश प्रसाद यादव बताते हैं कि पिछले साल तक उनके विद्यालय में दो बच्चे के नाम में पिता की नाम की जगह रूपचंद गंधर्व लिखा था। इस सत्र में रूपचंद वाला कोई छात्र नहीं है। दो-चार साल पहले पास करने वाली लड़कियों की शादी भी हो रही है। प्रोन्नत मध्य विद्यालय बढ़ैत के शिक्षक और चिकनमाटी के बीएलओ नकुल ङ्क्षसह बताते हैं कि उनके इस गांव का सभी बच्चा विद्यालय में नामांकित है। किसी बच्चे के नाम में पिता की पहचान रूपचंद से नहीं है। हां, इस गांव की मतदाता सूची में जरूर दर्जन भर मतदाता के नाम में पिता की जगह रूपचंद गंधर्व लिखा है। खास बात यह कि इस मतदाता सूची में कई मतदाता के पिता की जगह उनकी माता का नाम लिखा है।
बेनाम बच्चों के पिता बनते रहे रुपचंद
स्थानीय लोग बताते हैं कि रुपचंद का मतलब रुपये का औलाद होता है। देह व्यापार से जुड़ी गंधर्व परिवार की महिलाओं को संतानें हैं, मगर उन्होंने किसी पुरूष से विधिवत शादी नहीं की। ऐसे संतानों की पहचान ही रुपचंद से होती है। रुपचंद नाम कोई इंसान नहीं है। बस यह केवल एक संकेत है। पहले हर चेहरे के पिता की पहचान रुपचंद से होती थी अब उसे नाम मिलने लगा है।
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