मुरैना : 11 साल की सीमा खेल-खेल में ट्रेन में चढ़ गई, आठ साल बाद आई ताे परिवार में छाई खुशियां



 आठ साल पहले बेटी खेलते-खेलते ट्रेन में चढ़ गई। बेटी क्या खाेई परिवार की सारी खुशियां ही चली गईं। उधर ट्रेन में सवार हुई बेटी दिल्ली पहुंच गई। जहां पुलिसकर्मियाें ने उसे हॉस्टल में पहुंचा दिया। पढ़ लिखकर बच्ची जब आठ साल बाद मंगलवार काे अपने परिजनाें के बीच पहुंची ताे परिवार की खुशियाें का ठिकाना न रहा।

मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र के देवरी गांव का है, जहां एक किसान की बेटी 11 साल की उम्र में खो गई और 19 साल की उम्र में मिली है।

देवरी गांव के मंगाराम बघेल की बेटी सीमा बघेल 26 जून 2013 को अचानक लापता हो गई, उस समय सीमा की उम्र करीब 11 साल थी। महीनों तक स्वजन बेटी को तलाशते रहे, नहीं मिली तो 26 जनवरी 2014 को सिविल लाइन थाने में सीमा के अपहरण का मामला दर्ज करवाया गया। करीब 7 साल से सीमा की खोज में जुटी पुलिस ने सीमा को दिल्ली के तीस हजारी क्षेत्र में दिल्ली उन्नाति रेनवो होम हॉस्टल में ढूंढ लिया। सीमा ने बताया कि वह गांव के पास बहुत देर से रुकी एक ट्रेन में खेलने के लिए चढ़ गई और इस ट्रेन से वह दिल्ली पहुंच गई। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मिले पुलिसकर्मियों ने उसे हॉस्टल में भर्ती करवा दिया। सीमा ने हॉस्टल में रहकर 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली है। मंगलवार को सीमा को उसके पिता व अन्य स्वजनों से मिलवाया तो सीमा व उसका पूरा परिवार खुशी से रो पड़ा।

हॉस्टल शिक्षिका की मदद से मिली परिवार सेः सालों से परिवार से दूर रह रही सीमा को उसके परिवार से मिलाने में उसके हॉस्टल की एक शिक्षिका ने अहम भूमिका निभाई। उक्त शिक्षिका ने ही मुरैना में पुलिस को सूचना दी, उसके बाद पुलिस ने सीमा से संपर्क साधा। सीमा को दिल्ली से मुरैना लेकर आईं एसआई मेघा सोनी ने बताया कि सीमा को यह तो याद था कि वह मुरैना की है, लेकिन उसे अपने गांव का नाम याद नहीं था। हॉस्टल की शिक्षिका की सूचना के बाद उक्त युवती से पूछताछ हुई, उसके बाद जब उसे माता-पिता का फोटो दिखाया तो वह अपने परिवार को पहचान गई।

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