मुरैना: किसानों ने समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव में बेची सरसों



 मुरैना। सरसों के भाव इस साल रिकार्ड तोड़ रहे हैं। सरसों पर आई यह महंगाई न सिर्फ किसानों के लिए बल्कि कृषि मंडियों के लिए भी लाभकारी साबित हुई है। किसानों ने बिचौलियों के चक्र को तोड़ते हुए समर्थन मूल्य से 500 से 600 रुपये अधिक में सरसों बेची है। बढ़ी आवक और कम समर्थन मूल्य को देखते हुए मंडी में व्यापारियों ने किसानों को कम दाम देने का कई बार प्रयास किया, परंतु इस समय किसानों के समर्थन में सरकार और स्थानीय प्रशासन के रुख के कारण वे हावी नहीं हो पाए।

सरकार ने सरसों का समर्थन मूल्य पर 4650 रुपये क्विंटल तय किया है, जबकि बाजार में सरसों के दाम 5000 से लेकर 5200 तक हैं।

यही कारण है कि शनिवार को समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीदी शुरू होने से पहले ही मुरैना जिले में एक लाख 70 हजार 500 क्विंटल सरसों को किसान कृषि मंडी में व्यापारियों को बेच चुके हैं। मंडी ने पहली बार कमाया 1.20 करोड़ का टैक्स कोरोना काल में मुरैना सहित कई मंडियों की हालत ऐसी थी कि कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं बांट पा रहे थे।

मार्च में मुरैना मंडी में सरसों की रिकार्ड खरीदी-बिक्री से एक करोड़ 20 लाख रुपये का टैक्स मिला है। मंडी के लाइसेंसधारी व्यापारी को उपज खरीदी का 1.5 प्रतिशत मंडी टैक्स के मंडी देना होता है। यही मंडी की कमाई है। इसलिए महंगी हो रही है सरसों अभी सरसों की पैदावार का सीजन है। इस सीजन में सरसों के दाम घटते थे, लेकिन पहली बार सरसों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

दरअसल देश में तेल की मांग की पूर्ति के लिए विदेशों से राइसब्रान, पाम आइल आदि का आयात होता है। सरकार ने पिछले महीनों में तेल के आयात पर टैक्स दरों को बहुत अधिक कर दिया है। इस कारण विदेशी तेल का आना लगभग बंद सा हो गया है और इसके बाद से देश में सरसों के तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी पूर्ति को पूरा करने का असर सरसों व उसके तेल के दामों पर पड़ रहा है।

इनका कहना

सरसों के दाम अच्छे होने से किसान समर्थन मूल्य की जगह व्यापारियों को सरसों बेचना पसंद कर रहे हैं। यह कृषि मंडी के लिए भी वरदान साबित हुआ है। मार्च में मुरैना मंडी ने 1.20 करोड़ का टैक्स कमाया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। अगर दाम यही रहे तो बाकी किसान भी समर्थन मूल्य की जगह मंडी में ही सरसों बेचेंगे।

- शिवप्रताप सिंह सिकरवार, मंडी सचिव, मुरैना

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