पीला सोनाः किसानों के चेहरे खिले, सरकार का खजाना रहेगा खाली
ग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड-मुरैना, श्योपुर, दतिया जिले में पैदा होने वाले पीले सोने (काली सरसों) की बाजार में मांग से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। मंडी में किसानों को समर्थन मूल्य 4650 रुपये प्रति क्विंटल से 1350 रुपये ज्यादा यानी छह हजार रुपये क्विंटल का भाव मिल रहा है। किसानों की सरसों हाथों-हाथ बिक रही है, लेकिन सरकार के हाथ खाली हैं। खरीद केंद्रों पर सरसों का एक दाना भी नहीं पहुंचा है। इससे सरकार के खजाने पर असर पड़ेगा। दरअसल किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी सरसों नाफेड (नेशनल एग्रीकल्चर फेडरेशन आफ इंडिया लिमिटेड) के जरिए मुनाफे के भाव में पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों को बेची जाती है, जो इस बार संभव होती नजर नहीं आ रही है।
भिंड-मुरैना में तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा में सरसों:
भिंड-मुरैना जिले में इस बार तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा में सरसों की फसल हुई थी। ऐसे में मुरैना जिले में समर्थन मूल्य 4650 रुपये के भाव में सरसों खरीद के लिए सात लाख क्विंटल, भिंड में पांच लाख क्विंटल खरीदी का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन बाजार में इस बार सरसों की मांग ज्यादा होने से किसानों को मंडी में व्यापारी छह हजार का भाव दे रहे हैं। इससे सरकारी खरीद केंद्रों के गोदाम इस बार खाली हैं। पिछले वर्ष भिंड में 5 लाख 35 क्विंटल, मुरैना में 4 लाख 40 हजार क्विंटल सरसों की सरकारी खरीद हुई थी। इस बार खरीद केंद्र सूने हैं। यहां बता दें, ग्वालियर-चंबल अंचल से सरकारी खरीद के जरिए लाखों क्विंटल सरसों नाफेड के जरिए सरकार देश के दूसरे राज्यों में आनलाइन बोली लगाकर बेचती आ रही है, लेकिन इस बार खरीद नहीं होने से नाफेड के जरिए दूसरे राज्यों को सप्लाई नहीं होगी।
नए कृषि कानून से किसानों को मिल रहा सीध फायदाः
मंडी में सरसों खरीदी में इस बार नए कृषि कानून का असर भी माना जा रहा है। नए कृषि कानून में व्यापारी और किसानों को मंडी से बाहर भी खरीद-फरोख्त का अधिकार दिया गया है। यही वजह है कि भिंड मंडी में इन दिनों किसानों की सरसों स्थानीय रजिस्टर्ड व्यापारियों के अलावा दिल्ली, मुरैना और उत्तरप्रदेश के व्यापारी भी खरीद रहे हैं। इससे किसानों को मंडी में सरसों का भाव बेहतर मिल रहा है। कई स्थानीय व्यापारी दूसरे राज्यों के व्यापारियों के लिए ब्रोकर के रूप में सरसों की खरीद कर रहे हैं।
राइसब्रान, पाम महंगा होने से सरसों का भाव अच्छाः
सरसों के तेल की अंचल में सबसे ज्यादा मिल मुरैना जिले में हैं। यहां पहले से करीब 32 तेल इकाइयां संचालित हैं। इस बार अडानी, सलोनी जैसे बड़े ग्रुप सहित 10 इकाइयां और लग रही हैं। इससे सरसों की बाजार में मांग बढ़ गई है। दूसरा पिछले वर्षों तक मुरैना या अंचल में संचालित तेल मिलों में सरसों के तेल में राइसब्रान, पाम, सोया आयल की मिलावट की जाती थी। इस बार इनका आयात बंद होने से भाव ज्यादा है। पहले सरसों के तेल का भाव 80 रुपये लीटर होता था तो पाम आयल 60-65 रुपये लीटर के भाव में मिलता था। इससे मिलावट की जाती थी। अब सरसों का तेल 130 रुपये लीटर और पाम आयल 135 रुपये लीटर या इससे ज्यादा है।
वर्जनः
जिलें में पांच लाख क्विंटल सरसों खरीद का लक्ष्य था, लेकिन इस बार एक दाना नहीं आया है। समर्थन मूल्य पर खरीदी सरसों नाफेड के जरिए आनलाइन आक्सन कर दूसरे राज्यों को बेकी जाती थी। इस बार मालूम नहीं क्या होगा? किसानों को मंडी में अच्छा भाव मिल रहा है।
भजन लाल, प्रभारी डीएमओ, भिंड

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